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Electricity Code: सुरक्षित और मानक विद्युत प्रणाली की सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

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DS Group Solar (Solaxio DS Energy Pvt. Ltd.) | dsgroupsolar.in | संपर्क: 9584693271

बिजली की शक्ति और उसके खतरे

 

आज के आधुनिक भारत में बिजली केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की अनिवार्यता बन चुकी है। घर में पंखा, फ्रिज, AC से लेकर कारखाने की मशीनें, अस्पताल के उपकरण और सोलर पावर प्लांट तक, हर जगह विद्युत ऊर्जा की जरूरत है। भारत सरकार के MNRE (Ministry of New and Renewable Energy) के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 तक भारत की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 157 GW तक पहुंच चुकी है और भारत विश्व में तीसरा सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा देश बन गया है।

लेकिन बिजली की यह शक्ति जितनी उपयोगी है, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती है यदि इसका उपयोग सही मानकों के बिना किया जाए। गलत वायरिंग, खराब अर्थिंग, ओवरलोडिंग और सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी हर साल हजारों लोगों की जान ले लेती है।

 

34+

मौतें हर दिन (NCRB)

12,500+

मौतें हर साल

1 लाख+

10 साल में मौतें

400%

वज्रपात वृद्धि (2019-25)

 

स्रोत: NCRB (National Crime Records Bureau) और CROPC Annual Lightning Report 2024-25

Electricity Code क्या होता है?

 

Electricity Code विद्युत स्थापना (Installation), संचालन (Operation) और रखरखाव (Maintenance) से संबंधित नियमों एवं मानकों का एक व्यवस्थित समूह है। यह कोई एक किताब नहीं, बल्कि कई सरकारी और तकनीकी नियमावलियों का सामूहिक नाम है जो यह सुनिश्चित करती हैं कि विद्युत प्रणाली सुरक्षित, विश्वसनीय और कानूनी रूप से अनुपालन वाली हो।

 

भारत में लागू प्रमुख कानून और मानक

 

1. Electricity Act, 2003: यह भारत का मुख्य विद्युत कानून है जो विद्युत उत्पादन, पारेषण, वितरण और व्यापार को नियंत्रित करता है।

2. Central Electricity Authority (CEA) Regulations, 2023: CEA ने जून 2023 में नवीन सुरक्षा विनियम जारी किए जो सोलर और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों पर विशेष ध्यान देते हैं।

3. IS 3043 (BIS): भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का यह मानक अर्थिंग सिस्टम के डिजाइन और स्थापना की मार्गदर्शिका है।

4. IS 60898 (MCB) और IS 12640 (RCCB): सर्किट ब्रेकरों के लिए BIS मानक।

5. National Electrical Code (NEC): CPWD द्वारा भवन निर्माण में विद्युत स्थापना के लिए दिशानिर्देश।

 

Electricity Code के मुख्य उद्देश्य

  • मानव जीवन की सुरक्षा और बिजली के झटकों से बचाव
  • विद्युत अग्निकांड और दुर्घटनाओं की रोकथाम
  • महंगे उपकरणों और यंत्रों की सुरक्षा
  • ऊर्जा दक्षता और बिजली नेटवर्क की विश्वसनीयता
  • DISCOM (बिजली वितरण कंपनियों) के साथ कानूनी अनुपालन

भारत में विद्युत दुर्घटनाओं की भयावह वास्तविकता

 

भारत में विद्युत सुरक्षा की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। National Crime Records Bureau (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दशक (2011-2020) में लगभग 1.1 लाख लोगों की मौत बिजली के करंट से हुई। यह आंकड़ा 2022 में बढ़कर 12,492 और 2023 में लगभग 12,500 प्रति वर्ष हो गया। सरल भाषा में कहें तो भारत में हर दिन औसतन 34 लोग बिजली के करंट से मरते हैं।

दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण

 

A. बिजली का झटका (Electric Shock)

खराब या ढीले तार, अर्थिंग की कमी, नमी में विद्युत उपकरणों का उपयोग और बिना इंसुलेशन के तारों को छूना बिजली के झटके के मुख्य कारण हैं। 230 वोल्ट AC पर महज 100 मिलीएम्पियर की धारा भी मानव हृदय के लिए घातक हो सकती है।

 

B. विद्युत आग (Electrical Fire)

भारत में हर साल 7,000 से अधिक आग से होने वाली मौतों में एक बड़ा हिस्सा विद्युत शॉर्ट सर्किट से होता है। ओवरलोडेड वायरिंग, ढीले कनेक्शन, पुराने और निम्न गुणवत्ता के तार, और गलत फ्यूज का उपयोग विद्युत आग के प्रमुख कारण हैं।

 

C. वज्रपात (Lightning Strike)

भारत में मानसून के दौरान वज्रपात से होने वाली मौतें चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं। CROPC (Climate Resilient Observing Systems Promotion Council) की Annual Lightning Report 2024-25 के अनुसार, 2019 से 2025 के बीच भारत में बिजली गिरने की घटनाओं में लगभग 400% की वृद्धि हुई है। मध्यप्रदेश में 2014 से 2025 के बीच 3,496 लोगों की मौत वज्रपात से हुई जो देश में सबसे अधिक है। इसके बाद बिहार (3,041) और हिमाचल प्रदेश (2,923) का नंबर आता है।

 

चेतावनी: एक सामान्य वज्रपात में लगभग 30 करोड़ वोल्ट बिजली होती है जो तत्काल मृत्यु या गंभीर जलन का कारण बन सकती है।

सोलर प्लांट, खुले खेत, ऊंची इमारतें और बिना संरक्षण के स्थान वज्रपात के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं।

सही वायरिंग का महत्व: आपकी विद्युत प्रणाली की रीढ़

 

विद्युत प्रणाली में सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी घटक उसकी वायरिंग होती है। गलत वायरिंग न केवल बिजली की बर्बादी करती है बल्कि आग और दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण भी बनती है। सदैव ISI (Indian Standards Institution) प्रमाणित तार का उपयोग करें क्योंकि ये BIS द्वारा परीक्षित होते हैं।

 

केबल का चयन: कौन सी वायर कहां लगाएं?

 

केबल साइज उपयोग करंट क्षमता मानक
1.5 sqmm लाइट, पंखे, छोटे उपकरण लगभग 13A तक IS 694 / BIS
2.5 sqmm पावर सॉकेट, TV, कम्प्यूटर लगभग 20A तक IS 694 / BIS
4 sqmm AC, वॉटर हीटर, भारी लोड लगभग 27A तक IS 694 / BIS
6 sqmm बड़े AC, इंडस्ट्रियल पंप लगभग 36A तक IS 1554 / BIS
10+ sqmm मेन सप्लाई, मोटर, सबमेन 50A और उससे अधिक IS 1554 / BIS

 

वायरिंग में ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बातें

  • हमेशा ISI/BIS प्रमाणित केबल का उपयोग करें जिस पर IS 694 या IS 1554 की मुहर हो।
  • सोलर सिस्टम में DC वायरिंग के लिए UV Resistant Solar Cable अनिवार्य है क्योंकि सामान्य तार धूप में जल्दी खराब हो जाते हैं।
  • तांबे (Copper) के तार एल्युमिनियम की तुलना में अधिक सुरक्षित और टिकाऊ होते हैं।
  • प्रत्येक सर्किट की लोड कैलकुलेशन करके सही साइज का तार चुनें। कभी भी उससे छोटा तार न लगाएं।
  • तारों को उचित नाली (Conduit) में बिछाएं और नमी से बचाएं, विशेषकर बाहरी स्थानों पर।

अर्थिंग (Earthing): विद्युत सुरक्षा की आत्मा

 

अर्थिंग वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विद्युत उपकरणों के धात्विक हिस्सों को जमीन (Earth) से जोड़ा जाता है। यह विद्युत प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है जो BIS के IS 3043-2018 (Code of Practice for Earthing) द्वारा नियंत्रित होता है।

अर्थिंग क्यों जरूरी है?

 

जब किसी उपकरण में खराबी होती है और विद्युत धारा उसके धातु के आवरण (Metal Casing) में आ जाती है, तो बिना अर्थिंग के उस उपकरण को छूने वाले व्यक्ति को करंट लग सकता है और मृत्यु भी हो सकती है।

अर्थिंग इस करंट को सुरक्षित रूप से जमीन में भेज देती है जिससे MCB या RCCB तुरंत सप्लाई काट देता है।

अर्थिंग वोल्टेज सर्ज और लाइटनिंग के प्रभाव को भी कम करती है और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की रक्षा करती है।

 

अर्थिंग के मानक: IS 3043-2018

BIS का IS 3043-2018 मानक निम्न प्रावधान करता है:

  • Earth Electrode की न्यूनतम गहराई: Rod-type electrode के लिए कम से कम 2.5 मीटर।
  • Earth Resistance का मान: आदर्श रूप से 1 ओम से कम, और किसी भी स्थिति में 5 ओम से अधिक नहीं होना चाहिए।
  • सोलर प्लांट के लिए: 10 kW और उससे बड़े सिस्टम में DC Side, AC Side और Lightning Arrestor के लिए अलग-अलग तीन Earth Pit अनिवार्य हैं।
  • सामग्री: तांबे (Copper) की या Copper-Bonded Steel Rod का उपयोग करें जो जंग प्रतिरोधी हो।
  • Earthing का परीक्षण प्रत्येक 6 से 12 माह में करें और रिकॉर्ड बनाए रखें।

 

सोलर प्लांट में अर्थिंग: CEA 2023 नियम

Central Electricity Authority (CEA) के जून 2023 में जारी नए विनियमों के अनुसार सोलर प्लांट में निम्न अर्थिंग अनिवार्य है:

  • Module Structure Earthing: सभी सोलर पैनल की धातु संरचना को अर्थ से जोड़ना।
  • Inverter Earthing: इन्वर्टर का आवरण और DC Bus को उचित रूप से अर्थ करना। Flexible Braided Copper Wire का उपयोग अनिवार्य।
  • Lightning Arrestor Earthing: वज्रपात से बचाव के लिए लाइटनिंग अरेस्टर की अलग Earth Pit।
  • Junction Box Earthing: सभी Junction Box और ACDB/DCDB के धातु आवरण को अर्थ करना।

MCB, MCCB और RCCB: विद्युत सुरक्षा के तीन रक्षक

 

विद्युत सुरक्षा में Circuit Breakers की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये उपकरण स्वतः (Automatically) असामान्य विद्युत परिस्थितियों में सप्लाई काट देते हैं और दुर्घटना से बचाते हैं।

A. MCB (Miniature Circuit Breaker)

MCB एक छोटा स्वचालित स्विच है जो ओवरलोड और शॉर्ट सर्किट से सर्किट की रक्षा करता है। BIS मानक IS 60898 (IEC 60898-1 पर आधारित) के अंतर्गत MCB घरेलू और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए उपयुक्त है।

  • उपलब्ध क्षमता: 6A से 125A तक
  • प्रकार: Type B (घरेलू लाइट और पावर), Type C (मोटर और इंडक्टिव लोड), Type D (भारी औद्योगिक मशीनें)
  • उपयोग: घरों में Lighting Circuit और Power Socket Circuit में
  • लाभ: पुराने Rewirable Fuse की तुलना में अधिक सुरक्षित, बार-बार उपयोग योग्य

B. MCCB (Moulded Case Circuit Breaker)

MCCB बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए उपयोग किया जाने वाला Circuit Breaker है। यह IEC 60947-2 मानक के अनुरूप होता है और 100A से 2500A तक की क्षमता में उपलब्ध होता है।

  • उपयोग: कारखानों में Main Distribution Board, बड़े AC और मोटर के संरक्षण में
  • विशेषता: Thermal और Magnetic दोनों प्रकार की Protection, Adjustable Setting
  • Accessories: Auxiliary Contact, Shunt Trip, Under Voltage Release जोड़े जा सकते हैं
  • Short Circuit Capacity: MCB से बहुत अधिक, बड़े Fault Currents को संभालने में सक्षम

C. RCCB (Residual Current Circuit Breaker)

RCCB सबसे महत्वपूर्ण जीवन रक्षक उपकरण है। यह करंट लीकेज (Earth Fault Current) को पकड़ता है जिसे MCB नहीं पकड़ सकता। BIS मानक IS 12640 Part 1 के अनुसार RCCB भारत में उपयोग के लिए आवश्यक है।

  • कार्यसिद्धांत: यदि Phase Current और Neutral Current में 30mA या उससे अधिक का अंतर आता है, तो RCCB 25-40 मिलीसेकंड में सप्लाई काट देता है।
  • सेंसिटिविटी: मानव सुरक्षा के लिए 30mA RCCB सबसे उपयुक्त है।
  • उपयोग: गीले स्थान (बाथरूम, किचन, बाहर), सोलर प्लांट और जहां लोगों का संपर्क उपकरणों से होता है।
  • महत्वपूर्ण: RCCB Overload या Short Circuit से सुरक्षा नहीं करता। इसलिए MCB के साथ RCCB का संयोजन करें।

 

सलाह: RCCB और MCB के संयुक्त कार्य के लिए RCBO (Residual Current Circuit Breaker with Overcurrent Protection) का उपयोग करें।

सोलर सिस्टम में: DC Side पर DC RCCB और AC Side पर Standard RCCB का उपयोग करें।

हर 3 महीने में Test Button दबाकर RCCB का परीक्षण करें और सुनिश्चित करें कि वह ठीक से Trip हो रहा है।

 

Surge Protection Device (SPD): इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का रक्षाकवच

 

आधुनिक सोलर इन्वर्टर, स्मार्ट मीटर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अत्यंत संवेदनशील Semi-Conductor आधारित Components से बने होते हैं। एक मिलीसेकंड का Voltage Spike इन्हें स्थायी रूप से नष्ट कर सकता है। SPD इन्हीं खतरों से बचाने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

 

SPD क्यों जरूरी है?

  • वज्रपात (Direct या Indirect Lightning Strike) से उत्पन्न उच्च वोल्टेज सर्ज से सुरक्षा।
  • पावर ग्रिड में होने वाले Voltage Transients और Switching Surges से बचाव।
  • Inverter, Charge Controller, MPPT और अन्य Solar Electronics की दीर्घकालिक सुरक्षा।
  • SPD IEC 61643-11 (AC Systems) और IEC 61643-31 (DC PV Systems) मानकों के अनुरूप होने चाहिए।

 

सोलर प्लांट में SPD की स्थापना

  • DC Side SPD: Solar Panel और Inverter के बीच DC Surge Protector अनिवार्य।
  • AC Side SPD: Inverter के आउटपुट और Grid Connection के बीच AC SPD लगाएं।
  • Type 1 SPD: बड़े इंस्टॉलेशन में Main DB के प्रवेश बिंदु पर (Lightning Current Arrester)।
  • Type 2 SPD: Sub DB और उपकरण स्तर पर Voltage Surge Protector।

Lightning Protection System: वज्रपात से बचाव का विज्ञान

 

भारत में वज्रपात अब सबसे घातक प्राकृतिक आपदा बन चुकी है। CROPC की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2025 के बीच बिजली गिरने की घटनाओं में 400% की भारी वृद्धि हुई है जो जलवायु परिवर्तन का परिणाम है। अप्रैल 2025 में मार्च-अप्रैल की अवधि में 162 मौतें हुईं जो पिछले वर्ष की तुलना में 184% अधिक थीं।

Lightning Protection System (LPS) के घटक

1. Air Terminal (Lightning Rod)

यह धातु की नुकीली छड़ होती है जो इमारत या स्ट्रक्चर की सबसे ऊंची जगह पर लगाई जाती है। यह वज्रपात को अपनी ओर आकर्षित करती है और सुरक्षित रास्ते से जमीन में पहुंचाती है।

2. Down Conductor (Conductor Cable)

Air Terminal से Ground Earth Pit तक जोड़ने वाला मोटा धातु का तार। IS 2309 मानक के अनुसार यह आमतौर पर 25 sqmm से 50 sqmm का GI या Copper Strip होता है।

3. Earth Electrode (Ground Pit)

जमीन में गड्ढा खोदकर लगाई गई Earth Pit जहां Lightning का विद्युत प्रवाह सुरक्षित रूप से जमीन में विलीन हो जाता है। इसका Resistance 5 ओम से कम होना चाहिए।

 

सोलर प्लांट के लिए Lightning Protection

CEA Safety Regulations 2023 के Chapter X के अनुसार, सभी सोलर पावर प्लांट में Lightning और Overvoltage Protection का प्रावधान अनिवार्य है। इसमें शामिल हैं:

  • PV Array के ऊपर और आसपास Lightning Masts/Rods की उचित Placement।
  • Module Structure को Earthing Grid से जोड़ना ताकि Lightning Current सुरक्षित रूप से Dissipate हो।
  • SPD और Lightning Arrestor दोनों का संयोजन एक Complete Protection System बनाता है।
  • Equipotential Bonding: सभी धातु संरचनाओं को एक समान Potential पर बनाए रखना।

सोलर प्लांट में Electricity Code: CEA 2023 अनुपालन

 

भारत में सौर ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। MNRE के अनुसार FY 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड 44-45 GW सोलर क्षमता जोड़ी जो पिछले वर्ष से 106% अधिक है। रूफटॉप सोलर सेगमेंट में 8.7 GW की वृद्धि हुई जो 69% की सालाना बढ़ोतरी है। PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana के तहत 26 लाख से अधिक घरों को कवर किया गया है।

इतनी तेज गति से बढ़ते सोलर इंस्टॉलेशन के साथ सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

DC Side (सोलर पैनल से Inverter तक)

आवश्यक Equipment:

  • UV Resistant Solar Cable (PV1-F या H1Z2Z2-K): सामान्य तार की तुलना में 25 साल तक टिकाऊ।
  • MC4 Connectors: IP67 रेटेड Weatherproof Connectors जो नमी और धूल से सुरक्षित।
  • DC Isolator (Disconnect Switch): Inverter की Servicing के समय DC सप्लाई काटने के लिए।
  • String Combiner Box / DCDB: Multiple Strings को Combine करने और Fuse Protection के लिए।
  • DC SPD: Solar Array से आने वाले Voltage Surges को Ground करने के लिए।

AC Side (Inverter से Grid तक)

आवश्यक Equipment:

  • ACDB (AC Distribution Box): AC Side Protection और Monitoring के लिए।
  • AC SPD: Grid-side Voltage Surges से Inverter और उपकरणों की सुरक्षा।
  • MCCB/MCB: Overcurrent और Short Circuit Protection।
  • Energy Meter: DISCOM-approved Bidirectional Smart Meter Net Metering के लिए।
  • Anti-Islanding Protection: Grid Failure के समय Inverter का स्वतः बंद होना (CEA अनिवार्य)।

Net Metering Compliance

DISCOM से Net Metering Approval के लिए निम्न दस्तावेज और अनुपालन आवश्यक है:

  • Single Line Diagram (SLD): पूरी Electrical System का नक्शा।
  • Commissioning Report और Safety Declaration।
  • ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) Listed Solar Panels: जून 2026 से Non-DCR Panels पर प्रतिबंध लागू।
  • CEA/BIS Certified Inverter और अन्य Equipment।
  • Test Reports: Earthing Resistance, Insulation Resistance और I-V Curve Testing।

घरेलू सोलर इंस्टॉलेशन में विशेष सावधानियां

 

जब आप अपने घर की छत पर सोलर सिस्टम लगवाते हैं तो Electricity Code का पालन और भी आवश्यक हो जाता है क्योंकि यहां परिवार के सदस्य, बच्चे और बुजुर्ग भी रहते हैं।

इंस्टॉलेशन से पहले

  • Roof Load Capacity: एक Standard Solar Panel का वजन 20-25 KG होता है। सुनिश्चित करें कि आपकी छत इस भार को वहन कर सके।
  • Structural Assessment: विशेषकर पुरानी इमारतों में Structural Engineer से सलाह लें।
  • Water Proofing: Panel के नीचे छत में पानी न घुसे, इसके लिए उचित Waterproofing करें।
  • Shadow Analysis: दिन में 9 AM से 3 PM तक Panel पर कोई छाया न पड़े।

इंस्टॉलेशन के दौरान

  • केवल ALMM Listed और BIS Certified Solar Panels का उपयोग करें।
  • CEA और DISCOM Approved Inverter चुनें जिसमें Anti-Islanding Protection हो।
  • UV Resistant Solar Cable का उपयोग करें और सभी तारों को Conduit में बिछाएं।
  • Earthing अनिवार्य रूप से IS 3043 के अनुसार करें और Earth Resistance Test Report लें।
  • SPD और Lightning Arrestor लगाएं, खासकर मानसून प्रभावित क्षेत्रों में।

 

इंस्टॉलेशन के बाद

  • Net Metering के लिए DISCOM को आवेदन करें और Bidirectional Smart Meter लगवाएं।
  • System Commissioning Report और Test Certificates सुरक्षित रखें।
  • Remote Monitoring System से उत्पादन और Performance Track करें।
  • Annual Maintenance Contract (AMC) के तहत नियमित Panel Cleaning और Inspection करवाएं।

Commercial और Industrial (C&I) Solar Projects में सुरक्षा

 

व्यावसायिक और औद्योगिक सोलर प्रोजेक्ट में अत्यधिक उच्च क्षमता और जटिल विद्युत प्रणालियां होती हैं। यहां Electricity Code का पालन और भी कड़ाई से आवश्यक है।

LT और HT Protection

  • Low Tension (LT) Panel: MCCBs, Busbars और Metering Panels का उचित डिजाइन।
  • High Tension (HT) System (33kV/11kV): VCB, SF6 Breakers और Protective Relays।
  • Transformer Protection: Buchholz Relay, Oil Temperature Relay और Winding Temperature Relay।
  • Differential Protection: बड़े Transformers में Earth Fault और Short Circuit से सुरक्षा।

Advanced Earthing System

  • Mesh Earthing Grid: पूरे Plant क्षेत्र में धातु की जाली (Mesh) बिछाकर समान Potential बनाना।
  • Step Potential और Touch Potential: IEEE 80 मानक के अनुसार Design जो Plant के अंदर चलने वाले लोगों के लिए सुरक्षित हो।
  • Chemical Earth Pits: उच्च मृदा प्रतिरोधकता वाले स्थानों पर Chemical Treatment Earth Electrodes।

Energy Monitoring और SCADA System

बड़े Commercial/Industrial Installations में Real-Time Monitoring अनिवार्य होती जा रही है:

  • IoT आधारित Remote Monitoring System (RMS) से 24×7 उत्पादन, वोल्टेज, करंट और Temperature Track करें।
  • SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition): पूरे Plant के Centralized Control के लिए।
  • Preventive Maintenance Schedule: प्रत्येक 6 माह में Thermographic Survey, Earthing Test और Insulation Test।

DS Group Solar: आपका विश्वसनीय ऊर्जा साझेदार

 

Solaxio DS Energy Pvt. Ltd. (DS Group Solar) छत्तीसगढ़ के पेंड्रा रोड स्थित एक प्रतिष्ठित Solar EPC (Engineering, Procurement and Construction) कंपनी है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में वर्षों के अनुभव के साथ DS Group Solar ने 3,170 MW से अधिक परियोजनाएं सफलतापूर्वक कमीशन की हैं और 306 MW से अधिक परियोजनाएं वर्तमान में प्रगति पर हैं।

हमारी उपलब्धियां

 

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Commissioned Projects

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DS Group Solar की संपूर्ण सेवाएं

DS Group Solar “Loan Se Lekar ON Tak Hamari Jimmedari” के सिद्धांत पर कार्य करती है। इसका अर्थ है कि सोलर प्रोजेक्ट की वित्तीय योजना से लेकर इंस्टॉलेशन के बाद की देखभाल तक हर चरण में DS Group Solar आपके साथ है।

 

तकनीकी सेवाएं सहायता सेवाएं
Site Survey और Shadow Analysis Financial Support और Loan Facilitation
Load Analysis और System Design Net Metering Approval और DISCOM Coordination
Structure Engineering Design Remote Monitoring और IoT Integration
ALMM/BIS Certified Material Supply Solar Panel Cleaning Solutions
Earthing और Lightning Protection System Battery Energy Storage System (BESS)
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